Saturday, March 2, 2024
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उत्तराखंड में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयास! जल्द विश्वविद्यालयों में लागू होगा समान शैक्षणिक कैलेंडर

उत्तराखंड में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सभी राजकीय विश्वविद्यालयों में एक जैसा शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने की कवायद चल रही है। वहीं कैलेंडर जारी होने से छात्र-छात्राओं को भी सहूलियत होगी। वहीं अब तक प्रदेश में छात्र-छात्राओं की परीक्षाएं समय पर नहीं हो पाती थी व परिणाम घोषित करने में भी देरी होती है। जिसके बाद ये फैसला लिया गया है।

सूबे में बेहतर शैक्षिक वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से सभी राजकीय विश्वविद्यालयों में एक जैसा शैक्षणिक कैलेंडर लागू किया जाएगा। जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में छात्रों के लिये एक प्रवेश, एक परीक्षा, एक परिणाम, एक चुनाव एवं एक दीक्षांत समारोह की थीम पर कार्य करते हुए एकरूपता लाई जायेगी। वही अब महाविद्यालयों में एकरूपता लाने के लिए समान शैक्षणिक कैलेंडर को लागू करने की तैयारी की जा रही है जिससे छात्र-छात्राओं का समय बचने के साथ ही अन्यत्र संस्थानों में प्रवेश लेने के लिए सहूलियत रहेगी। इसके अलावा उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिये सभी शिक्षण संस्थानों को नैक मूल्यांकन कराना अनिवार्य होगा। इसके लिए कार्यशालाओं के माध्यम ये प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है। उच्च शिक्षा मंत्रीडॉ. धन सिंह रावत ने सभी कुलपतियों को विश्वविद्यालयों में लंबे समय से रिक्त चल रहे विभिन्न श्रेणी के पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए। डॉ. धन सिंह रावत ने सचिवालय स्थित डीएमएमसी सभागार में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें निदेशक उच्च शिक्षा के साथ ही प्रदेश के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव एवं परीक्षा नियंत्रक उपस्थित रहे।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि राज्य में समयबद्ध एवं गुणवत्ता परक शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के लिये सभी विश्वविद्यालयों में प्रवेश की तिथि, परीक्षा एवं परीक्षा परिणाम, छात्र संघ चुनाव व दीक्षांत समारोह के लिये समान एकेडमिक कैलेंडर लागू किया जायेगा। इसके लिये सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति आपस में बैठकर दो सप्ताह में शैक्षणिक कैलेंडर का ड्राफ्ट तैयार करेंगे, जिसको अगली बैठक में अंतिम रूप देते हुए स्वीकृति हेतु शासन को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि अक्सर देखने में आया है कि विश्वविद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया से लेकर परीक्षा के आयोजन का कार्य महीनों चलता रहा है जिससे छात्र-छात्राओं की परीक्षाएं समय पर नहीं हो पाती हैं व परिणाम घोषित करने में भी देरी होती है। धनसिंह रावत ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को अपने संबद्ध महाविद्यालयों में 180 दिवस अनिवार्य रूप से कक्षाएं संचालित करनी होगी, छात्र-छात्राओं को पुस्तकालयों में बैठकर अध्ययन करने के लिये प्रेरित करना होगा तथा परीक्षा में बैठने के लिये पूर्व से निर्धारित 75 फीसदी उपस्थित को अनिवार्य रूप से लागू किया जायेगा। विभागीय मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा को गुणवत्ता एवं रोजगारपरक बनाने के लिये विश्वविद्यालयों एवं सभी महाविद्यालयों को नैक मूल्यांकन कराना आवश्यक है, इसके लिए प्रदेशभर में आधा दर्जन कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जा रहा है। डॉ. रावत ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह की समान वेशभूषा व दीक्षा शपथ एकसमान होगी।

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