Tuesday, May 28, 2024
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इस बार महाशिवरात्रि पर बन रहा है उत्तम संयोग! चार प्रहर में शिव की आराधना का विशेष महत्व,भगवान शिव ऐसे होंगे प्रसन्न

प्रदेश में महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। मंदिरों की साज-सज्जा की जा रही है। इस बार महाशिवरात्रि पर खास योग बना रहा है, जिससे आप भगवान शिव की उपासना कर हर मुराद पूरी कर सकते हैं जानिए शुभ मुहूर्त में कैसे करें उपासना।

इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 18 फरवरी को मनाया जाएगा। इस साल महाशिवरात्रि पर सालों बाद दुर्लभ योग बना रहा है। इस बार भगवान शिव की पूजा से शनि देव का भी खास आशीर्वाद मिलगा। हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस वजह से महाशिवरात्रि पर शिव विवाह का आयोजन होता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महाशिवरात्रि के दिन रात्रि के चार प्रहर में शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिषाचार्यो के मुताबिक 18 फरवरी को रात 8 बजे से फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि लगेगी जिसका 19 फरवरी को शाम 4:18 बजे समापन होगा। महाशिवरात्रि में रात्रि पूजा का महत्व है। इसलिए महाशिवरात्रि 18 को मनाना उत्तम है। 18 फरवरी को शनिवार का दिन है। इसी दिन शनि त्रयोदशी तिथि यानी शनि प्रदोष व्रत का संयोग भी बन रहा है। प्रदोष व्रत और शिवरात्रि दोनों ही भगवान शिव को अति प्रिय हैं। महाशिवरात्रि पर शनिदेव अपनी ही राशि कुंभ में विराजमान रहेंगे।

इन दोनों ही संयोग में शनि देव की पूजा से धन, समृद्धि और संपन्नता प्राप्त होगी। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करें और उन्हें बेलपत्र, दूध, गंगा जल, शहद, पुष्प, श्रीफल आदि अर्पित करें. शिवजी को मीठी खीर का भोग लगाएं। ॐ नमः शिवाय मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। रात्रि में चार पहर की पूजा के बाद अगले दिन सुबह इस व्रत का पारण करें। 18 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही भगवान भोलेनाथ की पूजा प्रारंभ हो जाएगी। महाशिवरात्रि पर पूरे दिन शिवालयों में भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। इस दिन रात्रि के 4 प्रहर की पूजा भी महत्वपूर्ण होती है।शाम 6:13 बजे से रात 9:24 बजे तक, द्वितीय प्रहर पूजा मुहूर्त रात 9:24 बजे से देर रात 12:35 बजे तक, तृतीय प्रहर पूजा रात 12:35 बजे से अगली सुबह 3:46 बजे तक चतुर्थ प्रहर पूजा 19 फरवरी सुबह 3:46 बजे से 6:56 बजे की जाएगी। जबकि निशिता काल की पूजा का 18 फरवरी रात 12:09 बजे से देर रात 1:00 बजे मुहूर्त बन रहा है।

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