करीबी जीत और हार वाली सीटों का विश्लेषण करेगी भाजपा, उत्तराखंड में होंगी रणनीतिक बैठकें

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देहरादून। उत्तराखंड में आगामी 2027 विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। राज्य में सत्ता की हैट्रिक लगाने और चुनावी जमीन को पूरी तरह अभेद्य बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी रणनीतिक मोर्चेबंदी को धार देना तेज कर दिया है। इसी सिलसिले में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन आगामी 29 और 30 मई को उत्तराखंड के दो दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे पर आ रहे हैं।

खास बात यह है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा भव्य शक्ति प्रदर्शन या तड़क-भड़क वाले रोड शो की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मूल मंत्र 'ऊर्जा बचत, पर्यावरण संरक्षण और सादगी' का बड़ा संदेश देगा। पहले तय कार्यक्रम के अनुसार एयरपोर्ट से पार्टी मुख्यालय तक एक विशाल काफिले और भव्य रोड शो की रूपरेखा तैयार की गई थी, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर इसमें बड़ा बदलाव किया गया है। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष बेहद सीमित वाहनों के साथ सीधे कार्यक्रम स्थलों पर पहुंचेंगे। कार्यकर्ताओं को भी अनावश्यक वाहनों के उपयोग और बड़े काफिलों से बचने की सख्त हिदायत दी गई है। दो दिवसीय प्रवास के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में सरकार और संगठन की मैराथन समीक्षा बैठकें करेंगे। इस महामंथन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्रियों, सांसदों, विधायकों, कोर कमेटी के सदस्यों और जिला प्रभारियों की मौजूदगी रहेगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा का मुख्य फोकस इस बार उन विधानसभा सीटों पर है जहां पिछले चुनाव में जीत या हार का अंतर बेहद कम रहा था। इसके लिए संगठन ने बाकायदा विधानसभा क्षेत्रवार एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार की है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने इन 'हाईरिस्क' और हारी हुई सीटों का एक विशेष प्रेजेंटेशन रखा जाएगा, ताकि कमजोर कड़ियों को समय रहते दुरुस्त किया जा सके। उत्तराखंड भाजपा इस बार सांगठनिक स्तर पर 'बंगाल मॉडल' की तर्ज पर बूथ प्रबंधन को मजबूत करने में जुट गई है। रणनीति के तहत प्रत्येक बूथ पर 11 सदस्यों की एक मजबूत टीम गठित की जा रही है, जिसमें महिला मोर्चा, युवा मोर्चा और लाभार्थी संपर्क अभियान के जमीनी कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है। मतदाता सूची के हर परिवार तक सीधी पैठ बनाने के लिए 'पन्ना प्रमुखों' को नए सिरे से सक्रिय किया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले रहे नागरिकों से सीधे संवाद की कमान खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष परखेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष केवल संगठन ही नहीं, बल्कि सरकार के कामकाज का भी ब्योरा लेंगे। वे कैबिनेट मंत्रियों के साथ एक विशेष और अलग बैठक करेंगे। इसमें विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत, लंबित पड़े प्रोजेक्ट्स और अब तक की गई सरकारी घोषणाओं की प्रगति की तीखी समीक्षा होगी। पार्टी का स्पष्ट मानना है कि चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले सरकार की योजनाओं का सीधा और सकारात्मक असर जनता की चौखट पर दिखना अनिवार्य है।