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सेवा, समर्पण, कल्याण के भाव से सामाजिक न्याय की सिद्धि

डॉ. रमन सिंह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने 8 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस सरकार का आरंभिक मूल मंत्र रहा, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास। इन आठ वर्षों में केंद्र सरकार ने देश के प्रत्येक वर्ग, क्षेत्र और समाज को सशक्त बनाने की दिशा में बुनियादी कार्य किए हैं और उनके विकास को सुनिश्चित किया है। 2014 में प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सम्हालने के बाद नरेंद्र मोदी जी ने अपनी हर नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में देश ’प्रथम’ के संकल्प पर कायम रहे हैं। पहले जिन मसलों को सुलझाना असंभव माना जाता था, उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया से आसानी से सुलझा लेना भी मोदी सरकार के बेमिसाल आठ साल की बड़ी उपलब्धि रही है।
वैसे तो मोदी सरकार ने नारी शक्ति को सशक्त करने से लेकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और डिजिटल इंडिया से गरीब कल्याण तक हर वर्ग के उत्थान के लिए संचालित किया है जिसके सार्थक परिणाम भी देखने को मिल रहा है। भारत अभी भी गांव में बसता है, वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदाय और ग्राम समाज अभी भी अपनी आजीविका के लिए कृषि और वनोपज पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र में सुधार की दृष्टि पूर्व की सरकारों की नहीं रही, तभी तो देश की पहली कृषि नीति पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी जी के कार्यकाल में वर्ष 2000 में बनी। उनके सपनों को आगे बढ़ाने के लिए 2014 के बाद नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक संकल्प लिया, जिसमें एक ओर कृषि लागत को कम करने के लिए योजनाएं संचालित की जा रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों की उपज का अधिकाधिक मूल्य दिलाने के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश को लागू किया गया है। लागत के ढाई गुना समर्थन मूल्य देने का निर्णय लिया गया और 2014 में धान का समर्थन मूल्य  ?1460 था जो 2022 में ?1940 हो चुका है। पिछले छह वर्षों में धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 43 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। मोदी सरकार लगातार किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है, इसके तहत खेती में लागत कम करने के प्रयास किए जा रहे, जैसे मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी कर आवश्यकतानुसार खाद के उपयोग करने की प्रेरणा किसानों को दी जा रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से एक न्यूनतम ? 6,000 प्रतिवर्ष किसानों के खाते में नकद हस्तांतरित किया जा रहा है। मोदी सरकार कृषि क्षेत्र में बीज से लेकर बाजार तक किसानों के साथ खड़ी है। किसानों को राष्ट्रीय स्तर पर बाजारों से जोड़ा गया है ताकि उपज का बेहतर मूल्य मिले, मेगा फूड पार्क की स्थापना पर बल दिया गया है, 2014 में मात्र 2 मेगा फूड पार्क थे जो 2022 में बढक़र 22 हो गए हैं। किसानों  की आय बढ़ाने, बंजर भूमि पर सोलर पैनल लगाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है, दुग्ध और मछली उत्पादन में वृद्धि करने पर फोकस किया जा रहा है। नीली क्रांति को बढ़ावा देने के लिए मछली विभाग की स्थापना की गई है। यह उपाय किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं जिसका परिणाम अधिक उत्पादन और विदेशों में कृषि उत्पादों के निर्यात में बढ़त के रूप में है ।

कृषि के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के महत्वपूर्ण कदम उठाए गए । योजनाएं और कार्यक्रम तो सरकारें पहले भी बनाती थी लेकिन मोदी सरकार ने योजनाओं को जमीन पर उतारने में जो तत्परता दिखाई, उससे लाभार्थियों का कल्याण हुआ। जनधन योजना के माध्यम से 45 करोड़ से अधिक गरीबों के खाते खोले गए जिनमें सरकारी योजनाओं की राशि सीधे उनके खातों में डाली गई । इस कदम से भ्रष्ट व्यवस्था को दुरुस्त कर 2020 तक 1.7 लाख करोड़ की राशि की बचत हुई। उज्ज्वला योजना के जरिए माताओं बहनों को रसोई के धुएं से होने वाली श्वांस और आंखों की तकलीफ से राहत देने का काम हुआ। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना ने 2.3 करोड़ गरीबों को छत देने के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त किया। कोविड के संकट काल में जब रोजगार छीन गया, गांव और गरीबों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई, मोदी सरकार ने गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से 80 करोड़ जरूरतमंदों तक नि:शुल्क अनाज प्रदान किया ।

मोदी सरकार की योजनाओं के लाभार्थी ज्यादातर वंचित समाज रहे, प्रधानमंत्री किसान योजना के 63 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के किसान रहे। इसी प्रकार 70 प्रतिशत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से लाभ प्राप्त करने वाले वंचित समाज के हैं। मोदी सरकार में अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मिला, पिछड़े वर्ग को मेडिकल शिक्षण संस्थानों में अखिल भारतीय कोटा की सीटों पर आरक्षण कम दिया गया। बना साहेब भीमराव अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वाले तो बहुत मिले लेकिन नरेंद्र मोदी की पिछले आठ सालों के शासनकाल में बाबा साहेब के जीवन से जुड़े प्रमुख पांच स्थलों को पंचतीर्थ बनाकर उनका विकास किया गया। अब जनजातीय समाज के गौरव भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मानने का निर्णय लिया गया है। भारत जब स्वाधीनता के 75 वर्ष को अमृत महोत्सव के रूप में माना रहा है तो स्वतंत्रता के संघर्ष में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सेनानियों शहीदों की स्मृति में संग्रहालयों का निर्माण किया जा रहा है ।

जब सरकार कोई नारा देती है तो वह केवल उद्घोष करने के लिए नहीं होते, मोदी सरकार में वे नारे ही शासन के संकल्प हैं जिन्हें सिद्ध करने के लिए पूरी सरकार और प्रशासन तंत्र निरंतर अथक प्रयास कर रहे हैं। मोदी सरकार की देश की सेवा और समर्पण के रास्ते गरीब कल्याण की भावना के साथ अपने संकल्प को सिद्ध करने के आठ वर्षों में देश को नई ऊर्जा, विश्व स्तर पर एक नई पहचान मिली है और जनता में स्वाभिमान की भावना जागी है। सबके प्रयास से भारत को दुनिया का सिरमौर बनाने की दिशा में अग्रसर हैं

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