सागर शराब कांड: चार दिन पहले हुई आबकारी बैठक भी जांच के घेरे में

Blog
 Image

नई दिल्ली/सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले की बंडा तहसील में जहरीली शराब पीने से 11 लोगों की मौत की खबर सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। घटना शनिवार और रविवार की दरमियानी रात की बताई जा रही है। मृतकों में बंडा क्षेत्र के बराज गांव और आसपास के इलाकों के रहने वाले लोग शामिल बताए जा रहे हैं। एक साथ बड़ी संख्या में लोगों की मौत की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमले में भी खलबली मच गई। घटना की जानकारी मिलते ही सागर एसपी अनुराग सुजानिया समेत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और अधीनस्थ अमला मौके पर पहुंचा। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट किया जा रहा है कि मृतकों ने शराब कहां से खरीदी थी, शराब में कौन सा पदार्थ मिला था और मौतों के पीछे वास्तविक कारण क्या है। पुलिस और प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। इस दर्दनाक घटना के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में शहर के एक लाइसेंसी शराब ठेकेदार ने बाजार में ‘बांबे व्हिस्की’ के नाम से कथित तौर पर बिक रही नकली शराब को लेकर आबकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि शिकायत में नकली शराब की बिक्री का मुद्दा उठाए जाने के बावजूद विभाग की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। अब हादसे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अगर शिकायत पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती तो क्या इस तरह की घटना को रोका जा सकता था? हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। बताया जा रहा है कि घटना से महज चार दिन पहले आबकारी विभाग की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में लाइसेंसी शराब ठेकेदारों ने क्षेत्र में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध शराब के कारोबार और नकली शराब की बिक्री को लेकर अधिकारियों के सामने नाराजगी जताई थी। ठेकेदारों की ओर से अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने और नकली शराब के खिलाफ कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आई है। अब हादसे के बाद यह बैठक भी जांच के दायरे में आ सकती है। सवाल यह है कि बैठक में उठाई गई शिकायतों और चेतावनियों के बाद विभाग ने क्या कदम उठाए और अवैध शराब के कारोबार पर कितनी प्रभावी कार्रवाई की गई। जहरीली शराब पीने से गोलू उर्फ चमन लोधी, दिग्विजय, करतार सिंह, उजयार सिंह, रोशन लोधी, राजेंद्र, मूरत लोधी, हरनाम, उत्तम नत्थू नायक, सुमेर सिंह दांगी, राजकुमार लोधी, सुरेंद्र अहिरवार की मौत हो गयी। प्रारंभिक जानकारी में गोलू उर्फ चमन लोधी को कैंसर की शिकायत होने की बात भी सामने आई है। मौतों के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। घटना के बाद तबीयत बिगड़ने वाले कई लोगों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आठ लोगों को सागर के बीएमसी अस्पताल रेफर किया गया है। इनमें धनसिंह, मख्खन, मंगल रजक, परम आदिवासी, चंद्राभान, अजय, विनोद, राघवेंद्र का अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। 

कहां से आई शराब, कौन है जिम्मेदार? 
पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि मृतकों ने शराब कहां से खरीदी थी और उन्हें शराब किसने उपलब्ध कराई। इसके साथ ही कथित नकली शराब के स्रोत, उसके निर्माण और बिक्री से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या सभी मृतकों ने एक ही स्थान से शराब खरीदी थी या अलग-अलग जगहों से शराब का सेवन किया था। शराब के नमूनों की जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मौत की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है। मामले में संबंधित लोगों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाने की कार्रवाई की जा रही है।