उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सुधार के सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। हाल ही में जारी आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में औसत जीवनकाल बढ़कर 73 वर्ष हो गया है। यह आंकड़ा राज्य गठन के समय वर्ष 2000-01 में 60 वर्ष था, जो वर्ष 2022 में बढ़कर 71.7 वर्ष तक पहुंचा और अब इसमें और वृद्धि दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और जनस्वास्थ्य योजनाओं का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है। आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि राज्य में शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर में भी कमी आई है। वर्ष 2022 में जहां शिशु मृत्यु दर प्रति हजार 22 थी, वहीं अब यह घटकर 20 रह गई है। इसी प्रकार मातृ मृत्यु दर भी पहले की तुलना में कम हुई है। पहले यह प्रति लाख 103 थी, जो अब घटकर 91 पर आ गई है। सरकार का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता, टीकाकरण कार्यक्रमों और जनजागरूकता के कारण इन आंकड़ों में सुधार देखने को मिला है। हालांकि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। हाल ही में टिहरी जिले के घनसाली क्षेत्र में दो गर्भवती महिलाओं की मृत्यु का मामला सामने आया था। जांच में पाया गया कि दोनों महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर काफी कम था और समय पर निगरानी होती तो संभवतः उनकी जान बचाई जा सकती थी। इस घटना के बाद गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच की आवश्यकता को लेकर फिर से चर्चा तेज हुई है।
आर्थिक सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया है कि राज्य में मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए केरल मॉडल को अपनाया जा सकता है। केरल में गर्भवती महिलाओं की गर्भधारण के पहले दिन से ही नियमित निगरानी की जाती है। वहां प्रतिदिन स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी लेने के साथ हर महीने रक्त जांच भी की जाती है, जिससे स्वास्थ्य में होने वाले किसी भी बदलाव का समय रहते पता चल जाता है। रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि गर्भवती महिलाओं को पोषण के लिए दिए जाने वाले आयरन युक्त लड्डुओं की जगह आयरन की गोलियां दी जाएं, जिससे उन्हें अधिक प्रभावी पोषण मिल सके। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण में मातृ और शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं, जिन पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड में स्वास्थ्य संकेतकों में और बेहतर सुधार देखने को मिल सकता है।

