अंकिता केसः गैर-पारिवारिक शिकायतकर्ता की जांच की मांग

Blog
 Image

देहरादून। अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए एक बार फिर लोग सड़क पर उतरे हैं। आज रविवार को राजधानी देहरादून में महापंचायत का आयोजन किया गया। परेड मैदान में संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य व अन्य संगठनों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में जुटे हैं। महापंचायत में कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के घटक दलों के अलावा राज्य आंदोलनकारियों समेत तमाम सामाजिक और जन सरोकारों से जुड़े संगठन शामिल हुए। इस मामले में अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य मोहित डिमरी ने कहा कि इस मामले में धामी सरकार वीआईपी को बचाने का काम कर रही है। सीबीआई जांच में की गई चालाकी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जिसमें अनिल जोशी की शिकायत पर जांच हो रही है। हम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इसकी सीबीआई जांच चाहते हैं। हम अंकिता को न्याय दिलाने के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे। सत्यनारायण सचान ने कहा कि जिन्होंने वसंत विहार थाने में अंकिता केस में तहरीर दी है, उनका कोई संबंध अंकिता के परिवार से नहीं है और ना ही वह किसी आंदोलन में नजर आए। इसलिए उनकी भी जांच होनी चाहिए। उनके मोबाइल की भी जांच की जानी चाहिए कि उनकी इस संबंध में किससे बातें हुई है। इस महापंचायत में प्रस्ताव भी पास किए गए। महापंचायत में पहुंची शिबा ने कहा पर्यावरणविद की तहरीर के आधार पर जांच नहीं होनी चाहिए। इस मामले की सीबीआई जांच अंकिता भंडारी के माता-पिता की तरफ से दी गई तहरीर के आधार पर की जानी चाहिए। अंकिता हत्याकांड में सजायाफ्ता लोगों के केस के तहत अग्रिम जांच होनी चाहिए। अंकिता के मर्डर का क्या मोटिव रहा, यह बिल्कुल सामने नहीं आया है। उस संदर्भ में वीआईपी का साफ तौर पर जिक्र है। 

महापंचायत के प्रस्ताव 
पंद्रह दिनों के भीतर यदि पीड़ित परिवार की शिकायत आगे नहीं बढ़ी तो महापंचायत होगी, राष्ट्रपति से मुलाकात होगी। 
अंकिता के माता-पिता के शिकायती पत्र को ही सीबीआई जांच के लिए शिकायती पत्र माना जाए।
भाजपा नेता को जांच के दायरे में लाया जाए और निष्कासित किया जाए।