विधानसभा सत्र के लिए गैरसैंण में हलचल बढ़ी: कार्य मंत्रणा समिति तय करेगी सदन की बैठकों का समय

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गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में आगामी 9 मार्च से शुरू होने जा रहा विधानसभा का बजट सत्र बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं। इस बार सदन के भीतर एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिलेगी, जहाँ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस से कहीं अधिक सवाल खुद सत्ता पक्ष यानी भाजपा के विधायकों ने लगाए हैं। प्रश्नकाल के लिए तैयार की गई सूची के अनुसार, अपनी ही सरकार से जवाब मांगने में भाजपा विधायक सबसे आगे नजर आ रहे हैं। प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस इस बार सदन के भीतर और बाहर सरकार को घेरने के लिए आर-पार के मूड में है। विपक्ष ने सरकार की 'विफलताओं' को सूचीबद्ध करते हुए एक व्यापक चार्जशीट तैयार की है। कांग्रेस का मुख्य फोकस आसमान छूती महंगाई, विशेषकर रसोई गैस और खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतों पर रहेगा। इसके अलावा, राज्य के युवाओं में बढ़ते असंतोष, रोजगार के घटते अवसर और हालिया सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सामने आई धांधली व अनियमितताओं को लेकर विपक्ष ने तीखे तेवर अपना लिए हैं।

विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार, कार्य मंत्रणा समिति की बैठक 8 मार्च को गैरसैंण में आयोजित होगी, जिसमें सत्र का औपचारिक एजेंडा तय किया जाएगा। विशेष बात यह है कि सरकार बजट सत्र के पहले ही दिन राज्यपाल के अभिभाषण के तत्काल बाद सदन में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो राज्य के विधायी इतिहास में यह दूसरा अवसर होगा। इससे पहले मार्च 2022 में भी राज्यपाल के अभिभाषण वाले दिन ही लेखानुदान पेश किया गया था। इधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस की रणनीति पर कड़ा प्रहार किया है। शनिवार को मीडिया से बातचीत में भट्ट ने कहा कि कांग्रेस ने पिछले चार सालों में केवल हंगामा किया है और जनहित के मुद्दों से उनका कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "यदि विपक्ष का यही नकारात्मक रुख रहा, तो 2027 के विधानसभा चुनावों में उनका स्कोर शून्य होना तय है।" भट्ट ने कांग्रेस को गैरसैंण सत्र को लेकर बहानेबाजी छोड़ने और सदन में सार्थक चर्चा में भाग लेने की नसीहत दी है। 8 मार्च को गैरसैंण में जहाँ कार्य मंत्रणा समिति की बैठक होगी, वहीं उसी दिन विपक्ष भी अपने विधानमंडल दल की बैठक आयोजित कर सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों को अंतिम रूप देगा। विपक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बचने की कोशिश की, तो सत्र के पहले ही दिन सदन में भारी गतिरोध देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, गैरसैंण की बर्फीली वादियों के बीच होने वाला यह बजट सत्र उत्तराखंड की राजनीति के लिए बेहद गरम रहने वाला है। अब नजरें इस पर हैं कि सरकार विपक्ष के हमलों का कैसे जवाब देती है और बजट के माध्यम से प्रदेश की जनता के लिए क्या पिटारा खोलती है।