उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने इस वर्ष प्रारंभिक कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाओं को दो चरणों में आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसे लेकर शिक्षकों के बीच नाराजगी देखी जा रही है। विभाग के अनुसार, कक्षा छह से आठवीं तक की परीक्षाएं 12 से 18 फरवरी के बीच आयोजित की जाएंगी, जबकि कक्षा पहली से पांचवीं तक की परीक्षाएं बोर्ड परीक्षाओं के बाद 17 मार्च से 24 मार्च तक प्रस्तावित हैं।
विभाग का कहना है कि चरणबद्ध परीक्षा से विद्यालयों में भीड़ कम होगी और मूल्यांकन कार्य समय पर पूरा किया जा सकेगा। इससे परीक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होगी और समय प्रबंधन बेहतर होगा। हालांकि, शिक्षक संगठनों ने इस निर्णय को अव्यावहारिक और छात्र हित के विपरीत बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि दो चरणों में परीक्षा कराने से शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ेगा और नियमित शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल ने कहा कि परीक्षा समय तय करना एससीईआरटी का काम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा आयोजन को लेकर किसी भी शिक्षक को कठिनाई नहीं होनी चाहिए, परीक्षा चाहे आगे हो या बाद में। वहीं, उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रांतीय तदर्थ समिति सदस्य मनोज तिवारी ने कहा कि अलग-अलग परीक्षा कार्यक्रम जारी होने से शिक्षकों में ऊहापोह है।

