मदरसा बोर्ड और धर्मांतरण कानून पर कड़े फैसले: अमित शाह ने धामी सरकार के साहसिक सुधारों की सराहना की

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उत्तराखंड की सियासत में पिछले काफी समय से मुख्यमंत्री बदलने को लेकर चल रही तमाम अटकलों और चर्चाओं पर शनिवार को पूरी तरह से विराम लग गया। हरिद्वार की पावन धरती पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बीच जो 'शानदार बॉन्डिंग' नजर आई, उसने न केवल विपक्ष को खामोश कर दिया, बल्कि पार्टी के भीतर राह ताक रहे विरोधियों को भी कड़ा संदेश दे दिया। 'धामी सरकार के 4 साल बेमिसाल' कार्यक्रम के मंच से शाह ने जिस तरह मुख्यमंत्री की पीठ थपथपाई, उसने यह साफ कर दिया कि 2027 के चुनावी रण तक धामी ही भाजपा के 'सारथी' बने रहेंगे।

पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक यह हवा बनाई जा रही थी कि उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। विपक्ष के दावों और अंदरूनी खींचतान के बीच अमित शाह का यह दौरा 'गेम चेंजर' साबित हुआ। मंच पर अमित शाह और सीएम धामी के बीच की केमिस्ट्री ने यह स्पष्ट कर दिया कि हाईकमान का धामी पर अटूट भरोसा है। शाह ने अपने संबोधन में धामी की जमकर तारीफ की और उनके कार्यों को उत्तराखंड की प्रगति का आधार बताया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शाह की यह सार्वजनिक प्रशंसा धामी की कुर्सी को भविष्य के लिए और अधिक मजबूती प्रदान कर गई है। गृह मंत्री ने कांग्रेस के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए धामी सरकार की ईमानदारी पर मुहर लगाई। उन्होंने कहा, "उत्तराखंड में अब वह दौर बीत गया जब सचिवालय कमीशन एजेंटों से भरा रहता था और दलित छात्रवृत्ति जैसे घोटाले होते थे। धामी के नेतृत्व में अब राज्य में 'न पर्ची (सिफारिश), न खर्ची (रिश्वत)' का बोलबाला है। युवाओं को बिना रिश्वत के पारदर्शी तरीके से नौकरियां मिल रही हैं।" शाह ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार मुक्त शासन ही इस सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है, जिस पर विरोधी भी उंगली नहीं उठा सकते। अमित शाह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को विशेष रूप से समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने यह ऐतिहासिक कदम उठाया, जो जनसांख्यिकी में अप्राकृतिक वृद्धि को रोकने में सहायक होगा। इसके साथ ही, सख्त नकल विरोधी कानून और धर्मांतरण कानून को लेकर भी मुख्यमंत्री के दृढ़ संकल्प की सराहना की गई। शाह ने कहा कि एक ही कानून से सबको देश में रहना होगा और धामी ने इसे धरातल पर उतार कर मिसाल पेश की है। धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल के चार वर्ष (23 मार्च को पूर्ण) पूरे होने के अवसर पर उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया गया। शनिवार को ही एनसीआरबी (NCRB) ने उत्तराखंड को इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 के कार्यान्वयन में देश में प्रथम स्थान दिया है। 93.46 के शानदार स्कोर के साथ उत्तराखंड ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है।

इसके अलावा, सरकार की प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार रहीं:
मदरसा बोर्ड भंग करना और ऑपरेशन कालनेमि: प्रशासनिक सुधारों में कड़े फैसले।
मानसखंड मंदिर माला मिशन: 16 पौराणिक मंदिरों का जीर्णोद्धार।
महिला सशक्तिकरण: 'लखपति दीदी' योजना के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना।
विकास की नई राह: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और देहरादून में एआई आधारित ट्रैफिक सिस्टम को मंजूरी।

अमित शाह द्वारा सैकड़ों करोड़ की योजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के साथ ही भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव का बिगुल भी फूंक दिया है। शाह की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय है। अब यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी न केवल विकास पुरुष के रूप में उभरे हैं, बल्कि केंद्र के सबसे भरोसेमंद चेहरों में भी शामिल हो गए हैं। हरिद्वार की इस जनसभा के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि उत्तराखंड में 'धामी मैजिक' का दौर अभी जारी रहने वाला है।