शांभवी तिवारी और मीनल नेगी की गौरवपूर्ण उपलब्धि: उत्तराखंड की बेटियों ने पास की यूपीएससी परीक्षा

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संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में उत्तराखंड की बेटियों ने शानदार सफलता हासिल कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। किच्छा की शांभवी तिवारी ने परीक्षा में 46वीं रैंक प्राप्त की, जबकि टिहरी गढ़वाल की मीनल नेगी ने 66वीं रैंक हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों प्रतिभाशाली बेटियों से फोन पर बात कर उन्हें बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री धामी ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि उत्तराखंड की बेटियों द्वारा संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि शांभवी तिवारी और मीनल नेगी की सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों बेटियां अपनी प्रतिभा, परिश्रम और समर्पण के बल पर देश सेवा के मार्ग में नए कीर्तिमान स्थापित करेंगी।

मीनल नेगी मूल रूप से टिहरी जिले के चंबा ब्लॉक के दिवाड़ा गांव की रहने वाली हैं। वर्तमान में उनका परिवार देहरादून के मयूर विहार क्षेत्र में रहता है। मीनल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चंबा से प्राप्त की और वर्ष 2018 में 10वीं की परीक्षा 91.4 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद उनका परिवार देहरादून आ गया, जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने देहरादून के डीएवी पब्लिक स्कूल से इंटरमीडिएट की परीक्षा 98 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद देहरादून स्थित ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से बीएससी फिजिक्स ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की और डीएवी पीजी कॉलेज से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। मीनल के पिता प्रीतम सिंह नेगी टिहरी के डोबरा क्षेत्र में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता गीता नेगी गृहिणी हैं। उनके परिवार में एक बड़ा भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और छोटा भाई जेईई की तैयारी कर रहा है। मीनल नेगी ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उपलब्धि हासिल की है। पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए यूपीएससी परीक्षा में 66वीं रैंक प्राप्त की। वहीं किच्छा की शांभवी तिवारी ने भी 46वीं रैंक हासिल कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। उनकी सफलता से क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। प्रदेश में दोनों बेटियों की इस उपलब्धि को बड़ी प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है। खासतौर पर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं के लिए यह संदेश है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और लगन के दम पर बड़ी से बड़ी परीक्षा में सफलता हासिल की जा सकती है।