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पेंशनरों को बड़ी राहत: उत्तराखंड में पहली बार बनेंगे सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पहचान पत्र,एसओपी जारी करने की प्रक्रिया शुरू

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देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त हुए हजारों पेंशनरों के लिए एक बेहद राहत भरी और बहुप्रतीक्षित खबर आई है। प्रदेश में पहली बार सरकारी पेंशनरों के अधिकृत पहचान पत्र बनाए जाएंगे। इस ऐतिहासिक पहल से न केवल राज्य सरकार के पास पेंशनरों का एक सटीक और अपडेटेड डिजिटल डेटाबेस उपलब्ध होगा,बल्कि बुजुर्ग पेंशनरों को एक सम्मानजनक पहचान भी मिलेगी।

उत्तराखंड में सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त पेंशनरों को अब पहली बार आधिकारिक पहचान पत्र मिलने की राह खुल गई है। प्रदेशभर के सेवानिवृत्त पेंशनरों के पहचान पत्र बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू करने के साथ ही शासन ने इसके लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की कवायद तेज कर दी है। इस व्यवस्था से जहां पेंशनरों को एक आधिकारिक पहचान मिलेगी, वहीं सरकार के पास प्रदेश के पेंशनरों का व्यवस्थित और अपडेट डाटा भी उपलब्ध रहेगा।पेंशनरों की ओर से लंबे समय से पहचान पत्र जारी करने की मांग उठाई जा रही थी। गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन ने भी इस मुद्दे को लगातार शासन के सामने रखा। अगस्त में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पेंशनरों की विभिन्न मांगों को लेकर हुई बैठक में पहचान पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों के स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई। कार्मिक विभाग की सहमति मिलने के बाद वित्त सचिव डॉ. वी. षणमुगम ने संबंधित विभाग को पेंशनरों के पहचान पत्र जारी करने की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। शासन ने निदेशक कोषागार, पेंशन एवं हकदारी को पहचान पत्र जारी करने के लिए आवश्यक मानक प्रचालन प्रक्रिया तैयार करने और जारी करने के लिए अधिकृत किया है। एसओपी में पहचान पत्र बनाने की प्रक्रिया, पात्रता, आवश्यक अभिलेख और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को निर्धारित किया जाएगा। नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू पेंशनरों का अद्यतन डाटा तैयार होना भी है। वर्तमान में अलग-अलग विभागों और कार्यालयों से जुड़े पेंशनरों की जानकारी को एक व्यवस्थित प्रारूप में संकलित करने की जरूरत रहती है। पहचान पत्र व्यवस्था के साथ पेंशनरों की जानकारी को अपडेट रखने में मदद मिल सकती है। इससे भविष्य में पेंशनरों से संबंधित योजनाओं और सुविधाओं के संचालन में भी विभागीय स्तर पर बेहतर समन्वय संभव होगा। गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के सदस्य एवं उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच के संस्थापक अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे ने सरकार के निर्णय को पेंशनरों की लंबे समय से चली आ रही मांग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना है कि पहचान पत्र बनने से प्रदेशभर के पेंशनरों का अपडेट डाटा उपलब्ध रहेगा और पेंशनरों को अपनी पहचान प्रमाणित करने में सुविधा होगी। पहचान पत्र की व्यवस्था विशेष रूप से उन पेंशनरों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिन्हें विभिन्न सरकारी कार्यालयों या संस्थानों में अपनी पेंशनर पहचान से संबंधित कार्यों के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ते हैं। एक मानकीकृत पहचान पत्र होने से ऐसे मामलों में सुविधा मिलने की उम्मीद है। अब एसओपी जारी होने के बाद पहचान पत्र बनाने की वास्तविक प्रक्रिया स्पष्ट होगी। पेंशनरों की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार कब तक प्रक्रिया पूरी कर प्रदेशभर में पहचान पत्र जारी करने का काम शुरू करती है। लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद शुरू हुई यह पहल सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए प्रशासनिक स्तर पर एक नई सुविधा का आधार बन सकती है।