कक्षा 12 गणित की परीक्षा में अस्पष्ट आव्यूह प्रश्न छापने के लिए उत्तराखंड बोर्ड के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज की गई

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देहरादून। उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के बीच गणित के प्रश्नपत्र को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रश्नपत्र में पाठ्यक्रम से बाहर के सवाल पूछे जाने और प्रिंटिंग त्रुटियों के आरोप लगाते हुए राजकीय शिक्षक संघ ने सभी परीक्षार्थियों को बोनस अंक देने की मांग की है। इस संबंध में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के सचिव वीपी सिमल्टी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।

राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय नेता नवेंदु मठपाल के नेतृत्व में पहुंचे शिष्टमंडल ने आरोप लगाया कि हाईस्कूल गणित प्रश्नपत्र संकेतांक 231 (HRG) के प्रश्न संख्या 22 में समतल आकृतियों के संयोजन के क्षेत्रफल से संबंधित प्रश्न पूछा गया, जो प्रश्नावली 12.3 पर आधारित है। संगठन का कहना है कि यह प्रश्नावली सत्र 2023-24 से परिषद द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम से हटा दी गई थी। ऐसे में यह प्रश्न स्पष्ट रूप से आउट ऑफ सिलेबस है, जिससे छात्रों में भ्रम की स्थिति बनी और उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी प्रकार इंटरमीडिएट गणित प्रश्नपत्र संकेतांक 428 (IRS) में भी त्रुटियों की बात सामने आई है। शिक्षक संगठन के अनुसार प्रश्न संख्या 1 (ञ) में दिए गए कथन और कारण (Assertion-Reason) के विकल्पों में सही उत्तर उपलब्ध ही नहीं था। संगठन का दावा है कि सही उत्तर में ‘A’ गलत और ‘R’ सही होना चाहिए था, जबकि विकल्पों में यह संयोजन नहीं दिया गया। इससे परीक्षार्थियों को सही उत्तर चुनने में कठिनाई हुई। इसके अलावा प्रश्न संख्या 14 में भी प्रिंटिंग त्रुटि का आरोप लगाया गया है। संगठन के मुताबिक प्रश्न में ‘C’ को 3×3 का आव्यूह (मैट्रिक्स) दर्शाया जाना चाहिए था, तभी प्रश्न तार्किक रूप से पूर्ण होता। गलत छपाई के कारण प्रश्न अधूरा और भ्रामक प्रतीत हुआ, जिससे विद्यार्थियों में असमंजस बना रहा। शिक्षक संघ ने मांग की है कि इन सभी विवादित प्रश्नों की विषय विशेषज्ञों से निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। छात्र हित को सर्वोपरि बताते हुए संगठन ने कहा कि यदि प्रश्नों में त्रुटि सिद्ध होती है तो सभी परीक्षार्थियों को समान रूप से बोनस अंक दिए जाएं, ताकि किसी भी छात्र का शैक्षणिक नुकसान न हो। इस पर बोर्ड सचिव वीपी सिमल्टी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि संबंधित प्रश्नपत्रों की विशेषज्ञ समिति से जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और यदि त्रुटियां पाई जाती हैं तो विद्यार्थियों के पक्ष में निर्णय लिया जाएगा।