बिना प्रतिस्पर्धा वनरक्षक चयन की कहानी वायरल

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नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की ऐसी कहानी, जिसे सुनकर आप भी कहेंगे— किस्मत हो तो ऐसी! जहां एक ओर सरकारी नौकरी के लिए लाखों युवा कड़ी प्रतिस्पर्धा में पसीना बहा रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश से एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है। यहां वनरक्षक भर्ती की शारीरिक परीक्षा में 25 उम्मीदवारों को बुलाया गया था, लेकिन मैदान में पहुंची सिर्फ एक अभ्यर्थी। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि उसे किसी प्रतिद्वंद्वी को हराने की जरूरत ही नहीं पड़ी, क्योंकि मुकाबले में कोई था ही नहीं।

मध्य प्रदेश के सीधी वन मंडल में विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया और सहारिया समुदाय के युवाओं के लिए वनरक्षक के 8 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने और पात्रता जांच के बाद 25 अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए चुना गया। विभाग को उम्मीद थी कि मैदान में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी, लेकिन परीक्षा के दिन दृश्य बिल्कुल अलग था। ग्राउंड पर केवल अंजना बैगा, निवासी पाली, जिला उमरिया ही पहुंचीं। बाकी 24 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। ऐसे में न तो कोई रेस थी, न कोई प्रतिस्पर्धा और न ही किसी को पीछे छोड़ने की चुनौती। अंजना को सिर्फ अपनी क्षमता साबित करनी थी।

वनरक्षक भर्ती में 16 किलोमीटर की पैदल चाल पूरी करना अनिवार्य था। अंजना ने अकेले ही निर्धारित दूरी पूरी की, शारीरिक दक्षता परीक्षा पास की और सरकारी नौकरी हासिल कर ली। इस भर्ती प्रक्रिया में 8 पदों में से केवल एक पद भर पाया, जबकि शेष 7 पद रिक्त रह गए। जानकारी के मुताबिक, वन मंडल में कुल 1205 आवेदन प्राप्त हुए थे। मेरिट के आधार पर पांच गुना अभ्यर्थियों यानी 25 उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए बुलाया गया था, लेकिन अंततः केवल एक उम्मीदवार परीक्षा देने पहुंची और चयनित हो गई। 

यह कहानी सिर्फ किस्मत की नहीं, बल्कि इस बात की भी मिसाल है कि कई बार मैदान में डटे रहना ही सबसे बड़ी जीत बन जाता है। जहां लोग प्रतिस्पर्धा के डर से कोशिश तक नहीं करते, वहीं अंजना बैगा ने अकेले मैदान में उतरकर सरकारी नौकरी अपने नाम कर ली।