गढ़वाल और कुमाऊं के बीच संतुलन की कोशिश: शाह ने सभी सांसदों और मंत्रियों को दी तवज्जो

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हरिद्वार में आयोजित भाजपा की रैली के जरिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड की राजनीति को कई खुले और कुछ अप्रत्यक्ष संदेश दिए। गंगा तट से लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का संकल्प दोहराते हुए उन्होंने युवाओं को केंद्र में रखकर पार्टी की चुनावी रणनीति का संकेत दिया। अपने संबोधन में शाह ने युवाओं को “जिगर के टुकड़े” कहकर संबोधित किया और उनके भविष्य को लेकर केंद्र व राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। भाजपा नेतृत्व यह अच्छी तरह समझता है कि आगामी चुनावों में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां रोजगार और पलायन लंबे समय से प्रमुख मुद्दे रहे हैं, वहां युवाओं का समर्थन राजनीतिक समीकरण तय कर सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अमित शाह ने युवाओं से भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने की कोशिश की। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार उनके भविष्य को लेकर गंभीर है और विकास की योजनाएं इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

शाह के संबोधन का दूसरा अहम पहलू पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश था। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों त्रिवेन्द्र सिंह रावत, रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा और तीरथ सिंह रावत के नाम लेकर उनका उल्लेख किया। इसके बाद उन्होंने सांसदों का भी जिक्र किया और गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी को अपना मित्र बताते हुए पार्टी के वरिष्ठ और वर्तमान नेतृत्व को एक ही मंच पर लाने का प्रयास किया। इसे भाजपा के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी को समाप्त करने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। रैली में शाह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भी खुलकर सराहना की। उनके इस बयान को राज्य में चल रही संभावित अंदरूनी खींचतान पर विराम लगाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह संकेत भी दिया कि पार्टी को अब बयानबाजी और आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर आगामी चुनावों की तैयारी में जुटना चाहिए।

अमित शाह ने अपने संबोधन में केवल भविष्य के वादे ही नहीं किए बल्कि पिछले वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों का भी विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन और केदारनाथ पुनर्विकास परियोजना जैसी प्रमुख परियोजनाओं को सरकार की बड़ी उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया। इन परियोजनाओं के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा सरकार राज्य में बुनियादी ढांचे और धार्मिक पर्यटन को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। धर्मनगरी हरिद्वार से दिया गया यह संदेश राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गंगा तट से विकास और संस्कृति के मेल की बात करते हुए शाह ने हिंदू आस्था और सांस्कृतिक पहचान को भी अपने भाषण का हिस्सा बनाया। इसे हिंदू वोट बैंक को एकजुट बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस रैली के जरिए अमित शाह ने एक साथ कई लक्ष्य साधने का प्रयास किया है युवाओं को साधना,पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देना और आगामी चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं में जोश भरना। हरिद्वार की इस रैली को भाजपा के लिए चुनावी शंखनाद के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिसने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में आना होगा।