दिल्ली के मालवीय नगर स्थित 'फ्लोरिश स्टेज होटल' में हुए भीषण अग्निकांड ने अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। इस हादसे में 21 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा उत्तराखंड मूल के 65 वर्षीय बुजुर्ग शेफ केशव नेगी को गिरफ्तार किए जाने पर चौतरफा आक्रोश फूट पड़ा है। सोशल मीडिया से लेकर उत्तराखंड के गलियारों तक दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीधे दिल्ली सरकार से संपर्क साधकर एक्शन लिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस संवेदनशील मामले में सीधे दखल देते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से फोन पर विस्तृत वार्ता की। सीएम धामी ने दिल्ली सरकार से साफ शब्दों में न्याय की अपील की है। वार्ता के बाद दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने आश्वस्त किया कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ रत्ती भर भी अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जांच पूरी तरह तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर ही आगे बढ़ेगी। इसके साथ ही, सीएम धामी ने दिल्ली में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों को सुरक्षा का भरोसा देते हुए शहीद समान संघर्ष कर रहे केशव नेगी की पुत्री कनिष्का नेगी से भी फोन पर बात की और उन्हें हर संभव कानूनी व प्रशासनिक सहायता देने के लिए आश्वस्त किया। इस बीच, उत्तराखंड के दिग्गज नेताओं ने भी दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को आड़े हाथों लिया है। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि एक साधारण कर्मचारी को बलि का बकरा बनाना न्यायसंगत नहीं है। गोदियाल ने आरोप लगाया कि होटल के मालिक, प्रबंधन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले असली अपराधियों और रसूखदारों को बचाने के लिए एक छोटे कर्मचारी को मोहरा बनाया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा, "हम सिर्फ उत्तराखंड के शेफ की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि बात उस अन्याय की है जहां असली दोषियों को पकड़ने के बजाय एक बेकसूर पर दोष मढ़ा जा रहा है, जिसने खुद मुश्किल से अपनी जान बचाई। हादसे की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आग की वजह शॉर्ट सर्किट, किचन हादसा या कोई तकनीकी खराबी हो सकती है। लेकिन सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि यह होटल बिना किसी 'फायर एनओसी' (अग्निशमन विभाग के अनापत्ति प्रमाण पत्र) के अवैध रूप से संचालित हो रहा था। विपक्ष और जनता का सवाल है कि जब होटल में सुरक्षा और बचाव के कोई इंतजाम ही नहीं थे, तो इसके लिए जिम्मेदार मालिक और लाइसेंस देने वाले अधिकारी आजाद क्यों हैं? फिलहाल, उत्तराखंड सरकार की सक्रियता के बाद इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का दबाव दिल्ली पुलिस पर बेहद बढ़ गया है।

